मीन लग्न एवं मेष राशि होने पर सूर्य की दृष्टि जब चन्द्रमा पर होती है तो किस प्रकार का प्रभाव देखा जाता है , इसको समझने का प्रयास करते है !
सबसे पहले ग्रहो की परिस्थति को समझते है , मीन लग्न का मतलब है की लग्न भाव में बारह नंबर लिखा आएगा और मेष राशि का मतलब है चन्द्रमा मेष राशि में होंगे , जहा चन्द्रमा होंगे वहां एक नंबर लिखा होगा ! मीन लग्न में एक नंबर लिखा होगा द्वितीय भाव में जिसको धन भाव भी कहते है ! मीन लग्न में चन्द्रमा की भूमिका पंचमेश की होती है और पंचमेश चन्द्रमा अपने से दशम भाव में विराजमान है , मेष राशि होने पर सूर्य की दृष्टि चन्द्रमा पर तब होगी जब सूर्य तुला राशि यानि जहा सात नंबर लिखा होगा वहाँ विराजमान होंगे , मीन लग्न के चार्ट में तुला राशि बनेगी अष्टम भाव में जहा सात नंबर लिखा आएगा ,और जब वही सूर्य विराजमान होंगे तो सूर्य की दृष्टि चन्द्रमा पर होगी ! मीन लग्न के चार्ट में सूर्य षष्ठेश होते है जो अपने तीसरे भाव में अष्टम भाव में विराजमान है ! अब हमलोग सूर्य के दृष्टि प्रभाव को समझेंगे , सूर्य जब भी तुला राशि में विराजमान होते है सूर्य नीच के हो जाते है इसलिए जातक को सूर्य सेमिलने वाला फल नहीं मिल पाटा है ! पिता के होने कारन जो जातक को सुख मिलना चाहिए उस सुख से वंचित हो जाता है ! मान सम्मान नहीं मिल पता है , सरकारी नौकरी मिलने में बहुत तकलीफो का सामना करना पड़ता है ! सूर्य के नीच राशि में और अष्टम भाव में होने के कारन जातक को रक्तचाप की समस्या देखने को मिल सकती है स्वधान रहना चाहिए , ह्रदय सम्बंधित रोगी से सावधान रहना चाहिए ! सूर्य जब तुला राशि में होते है तो ज्यादा असहज हो जाते है , और उस स्थिति में उनकी दृष्टि जायदा नकारात्मक प्रभाव देती है ! सूर्य षष्ठेश है तो जातक को किसी तरह के लफड़े से बचना चाहिए , लड़ाई झगडे से बचना चाहिए , कर्ज लेने से बचना चाहिए , कोर्ट कचहरी के मामले से बचना चाहिए , सूर्य कोर्ट कचहरी के मामलो में नकारात्मक फल दे सकते है ! सूर्य की दृष्टि जब दूसरे भाव पर होगी और चन्द्रमा पर होगी तो जातक की वाड़ी में दोष उत्पन्न हो जायेगा , रौदे वाड़ी हो सकती है , रिस्तेदार से लफड़े हो सकते है , नकारात्मक फल देखने को मिल सकता है , जातक को यह दृष्टि पराभव गलत तरीके से धन को अर्जित करने के लिए प्रेरित कर सकता है , जातक को ठगने के लिए प्रेरित कर सकता है ! यह दृष्टि प्रभाव जातक की माता के स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव दे सकता है ! माता के साथ वाद विवाद करा सकता है , जातक को अपना जन्म स्थान छोड़ने के लिए परिस्थिति बना सकता है ! जातक के अंदर ज्यादा एटीएम विश्वास दे सकता है , अहंकार दे सकता है और बहुत ज्यादा गुस्से की प्रविर्ती को यह दृष्टि प्रभाव जागृत कर सकता है जिसका परिणाम नकारात्मक देखने को मिल सकता है ! यह दृष्टि प्रभाव जातक के अंदर लीडर शिप गुण भी दे सकता है लेकिन जातक को इस गुण का द्रुप्योग करने के लिए बाध्य कर सकता है ! जातक को इस दृष्टि प्रभाव के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए , शिवलिंग पर जल अभिषेक करना चाहिए , ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए , महा मृतुन्जय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ) का भी जाप करना चाहिए और गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”. )
का भी जाप जरूर करना चाहिए !
मिथिलेश सिंह 9310804931, 7579663427

