आप सभी जानते हैं तुला राशि के स्वामी ग्रह शुक्र होते हैं, और शुक्र दो राशियों के स्वामी ग्रह होते हैं ,तुला राशि एवं वृषभ राशि दोनों राशियों के स्वामी ग्रह शुक्र होते हैं , तुला लग्न के चार्ट में वृषभ राशि बनेगी अष्टम भाव में और तुला लग्न का मतलब ही है तुला राशि पहले भाव में बनेगी ! इस बात से हमें समझ आता है कि लग्नेश भी शुक्र है और आष्टमेश भी शुक्र है ! लग्नेश शुक्र अष्टम भाव में वृषभ राशि में है और अष्टमेश शुक्र अपने ही राशि में अष्टम भाव में विराजमान है ! यह हम लोग के सामने संयोग के रूप में है ! इस संयोग को समझने का प्रयास करते हैं ! सामान्य तौर पर तुला लग्न का जो जातक होता है , गुढ़ ज्ञानी होता है रहस्यवादी ज्ञान की समझ वाला होता है ,ऐसा जातक तौल कर व्यवहार करने वाला होता है, परिस्थितियों को बखूबी अच्छे से समझने वाला होता है, तुला लग्न का जो जातक होता है उसके अंदर ग्लैमरस इंडस्ट्रीज के प्रति एक आकर्षक देखा जाता है, तुला लग्न का जातक भोग विलास के प्रति भी आकर्षित रहता है ! लग्नेश का संबंध अष्टम भाव से होना बता रहा है कि जातक का व्यक्तित्व अष्टम भाव से संबंधित जो क्षेत्र है उस क्षेत्र की तरफ व्यक्तित्व का आकर्षण देखा जाएगा , उस क्षेत्र पर जातक के व्यक्तित्व का पकड़ देखा जाएगा , ऐसा जो जातक होगा अच्छा ज्ञानी हो जाएगा, रहस्यवादी ज्ञान की समझ वाला हो जाएगा ,ज्योतिष विद्या का जानकारी हो जाएगा ,तंत्र विद्या ,मंत्र विद्या ,सट्टा मार्केट के प्रति आकर्षण ,रिसर्च की प्रवृत्ति वाला जातक हो जाएगा ! इन सभी क्षेत्र के प्रति जातक के व्यक्तित्व में जैसे-जैसे जातक बड़ा होता जाएगा आकर्षण बढ़ता जाएगा !जातक अष्टम भाव से संबंधित क्षेत्र में काम करके अपने आप को संतोष पूर्ण महसूस करेगा ! साथ में यह भी देख रहा हूं कि व्यक्तित्व का संबंध अष्टम भाव से होना और अष्टमेश भी शुक्र का होना यह बता रहा है की अष्टम जो भाव होता है आप सभी जानते हैं बड़ी बीमारियों का भी होता है ,आयु का भी होता है , इसके फल स्वरुप थोड़ी सी शुक्र से संबंधित जो क्षेत्र है , शुक्र जिन बीमारियों को रिप्रेजेंट करते हैं , उस तरह की बीमारी होने की संभावना भी देखी जा सकती है ! गुप्त रोग से संबंधित जातक को सावधान रहने की आवश्यकता होगी ! साथ में यह भी देख रहा हूं ऐसा जो जातक होगा शेयर मार्केट से जुड़कर से ट्रेडिंग करके धन को अर्जित करने वाला हो सकता है ! एक और मुख्य बात यहां पर देखने को मिल रहा है, शुक्र लग्नेश होकर
शुक्र अष्टमेश होकर एवं लग्नेश होकर, अष्टम भाव में विराजमान होकर द्वितीय भाव पर अपना दृष्टि प्रभाव डाल रहे हैं , शुक्र का द्वितीय भाव पर दृष्टि प्रभाव होना इस बात का संकेत दे रहा है ,की जातक का व्यक्तित्व धन कमाने को लेकर बहुत ज्यादा आकर्षित रहेगा ! बहुत ज्यादा डेडीकेटेड हो जाएगा ,केंद्रित हो जाएगा! जातक की जो वाणी होगी, बहुत ही मधुर होगी आकर्षित करने वाली होगी , रिश्तेदारों के साथ जो संबंध होंगे वह भी फायदेमंद हो सकते हैं, और रिश्तेदारों के साथ जुड़कर जातक धन को अर्जित करने वाला भी हो सकता है !
इस संयोग के साथ हमें यह भी पता चलता है ,कि ऐसे जातक को गुप्त धन की प्राप्ति हो सकती है ,किसी उसके रिश्तेदारी में कोई ऐसा व्यक्ति हो जो उसे धन प्रदान करें ,गुप्त धन के रूप मैं ! और यह जो भी प्रभाव बताया गया है सामान्य प्रभाव है, इन सभी प्रभाव में बदलाव देखा जा सकता है, बाकी सभी ग्रहों का दृष्टि प्रभाव के आधार पर युति के आधार पर ग्रहों के डिग्री के आधार पर नक्षत्र के आधार पर प्रभाव में बदलाव देखे जा सकते हैं !
मिथिलेश सिंह

