कुम्भ लग्न एवं मीन राशि में सूर्य की दृष्टि चंद्रमा पर होने का प्रभाव

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कुम्भ लग्न एवं मीन राशि होने पर सूर्य की दृष्टि चन्द्रमा पर होने के प्रभाव को समझते है ! कुम्भ लग्न के चार्ट में १२ नंबर राशि दूसरे भाव में बनेगी जहा चन्द्रमा विराजमान होंगे ! कुम्भ लग्न के चार्ट में चन्द्रमा की भूमिका षष्ठेश की होती है , जो अपने से नवम भाव में लग्न चार्ट में दूसरे भाव में विराजमान है ! सूर्य की भूमिका कुम्भ लग्न में सप्तमेश की होती है जो अपने से दूसरे भाव में और लग्न चार्ट के अनुसार अष्टम भाव में विराजमान है ! चन्द्रमा का दूसरे भाव में विराजमान होना बताता है की जातक का मन धन से जुड़ेगा जातक धन को अर्जित करने के प्रति ज्यादा जागरूक रहेगा और चन्द्रमा षठेश होकर जब धन भाव में विरजंमां होंगे तो जातक छठे भाव के छेत्र से धन अर्जित करने का प्रयास करेगा ! जातक हॉस्पिटल से जुड़े काम कर सकता है , जातक के भाग्य उदय में छठे भाव की भूमिका देखि जा सकती है , जातक छठे भाव के छेत्र में ही जीवकोपार्जन करे ऐसा हो सकता है !

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चन्द्रमा जब षष्ठेश होकर दूसरे भाव में मीन राशि में विराजमान होंगे तो इसका प्रभाव इस प्रकार भी हो सकता है विशेष परिस्थिति में को जातक जो फैसला ले उसमें उसके धन का नुक्सान हो , जातक कैसी कारन से कोर्ट कचहरी के मामलो में फसकर धन का नुक्सान करे ! कुम्भ लग्न के चार्ट में सप्तमेश सूर्य होते है जो अष्टम भाव में कन्या राशि में विराजमान होंगे ! सप्तमेश जब अष्टम भाव से विराजमान होते है तो इसका तात्पर्य है की जातक की जीवनसाथी गूढ़ ज्ञानी हो , रहस्य्ववादी ज्ञान की समझ रखने वाले हो , यह प्लेसमेंट गुप्त सम्बन्धो को भी दर्शा रहा है ! सूर्य से सम्बंधित , रक्तचाप की समस्या , ह्रदय रोग से सम्बंधित बीमारिया , आँखों से सम्बंधित परेशानी , पिता को कोई बिमारी भी सूर्य का अष्टम भाव में विराजमान होना दे सकता है ! साथ में सूर्य जब चन्द्रमा पर एवं दूसरे भाव पर दृष्टि डालेंगे तो दूसरे भाव में अग्नि तत्व की मात्रा बढ़ेगी ,जिसके परिणाम में जातक का धन प्राप्त करने के प्रति झुकाव ज्यादा हो सकता है , जातक धन कमाने के उद्देश्य से अपने कर्तव्यों का प्लान नैतिकता के साथ करते देखा जा सकता है ! जीवन साथी से धन लाभ हो सकता है , रिस्तेदार से विवाद हो सकता है , वाणी दोष देखा जा सकता है , जातक गुप्त सम्बन्धो में फसकर कोर्ट कचहरी मामले में फास सकता है ! माता के साथ वाद विवाद हो सकता है , उनके सवास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा सकता है , जातक बहुत प्रभावी लीडर हो सकता है , उसकी वाणी प्रभावी हो सकती है , आत्मा विश्वास से भरा हुआ जातक हो सकता है , सरकारी क्षेत्र से लाभ लेने वाला हो सकता है , जातक की जीवन साथी सरकारी कर्मचारी हो सकती है ! जातक को इस दृष्टि प्रभाव के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए , शिवलिंग पर जल अभिषेक करना चाहिए , ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए , महा मृतुन्जय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ) का भी जाप करना चाहिए और गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”. )
का भी जाप जरूर करना चाहिए !

मिथिलेश सिंह